कल दोपहर की बात है, मैं अपने घर के पास वाली दुकान पर दूध लेने गया था। जब पैसे देने की बारी आई, तो पता चला कि मैं अपना बटुआ घर ही भूल आया हूँ। जेब में सिर्फ मेरा इनफिनिक्स हॉट 10 था। दुकानदार ने कहा कि भाई व्हाट्सएप तो चलाते ही हो, उसी से पेमेंट कर दो। मैंने पहले कभी व्हाट्सएप से पैसे नहीं भेजे थे क्योंकि मेरे मन में भी वही डर था जो शायद आपके मन में होगा—कि कहीं मेरा बैंक अकाउंट खाली न हो जाए।
लेकिन उस दिन मजबूरी थी, तो मैंने अपना बैंक अकाउंट लिंक किया और पेमेंट कर दी। उसके बाद मैंने इस पर काफी रिसर्च की और कुछ ऐसी बातें जानीं जो हर कैशपांडा पढ़ने वाले को पता होनी चाहिए। आज मैं आपको वही सब बताऊंगा कि ये सिस्टम काम कैसे करता है और आपको किन बातों का ख्याल रखना है।
WhatsApp Payment असल में है क्या?
सबसे पहले तो ये जान लो कि व्हाट्सएप कोई बैंक नहीं है। ये सिर्फ एक माध्यम है। ये उसी यूपीआई (UPI) सिस्टम पर काम करता है जिस पर गूगल पे या फोनपे चलते हैं। इसका मतलब ये है कि जब आप किसी को पैसे भेजते हैं, तो वो पैसा व्हाट्सएप के पास नहीं जाता बल्कि सीधे आपके बैंक से दूसरे के बैंक में पहुँचता है।
मैंने इसके बारे में पढ़ा तो पता चला कि इसे भारत सरकार की संस्था एनपीसीआई ने बनाया है। तो तकनीकी तौर पर ये उतना ही भरोसेमंद है जितना कोई भी दूसरा सरकारी पेमेंट ऐप।
वो सेटिंग्स जो मैंने खुद अपने फोन पर बदलीं
जब मैंने व्हाट्सएप पेमेंट शुरू किया, तो मैंने अपनी सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किए। डिफॉल्ट सेटिंग्स में फोन उतना सुरक्षित नहीं होता जितना हम उसे बना सकते हैं।
सबसे पहले मैंने टू स्टेप वेरिफिकेशन ऑन किया। ये एक तरह का डिजिटल ताला है। अगर कोई मेरा सिम कार्ड भी निकाल ले, तो भी वो बिना उस छह अंकों के कोड के मेरा व्हाट्सएप नहीं चला पाएगा। इसे आप सेटिंग्स में अकाउंट के अंदर जाकर आसानी से चालू कर सकते हैं।
दूसरी चीज़ जो मैंने की, वो थी फिंगरप्रिंट लॉक। मैं नहीं चाहता कि अगर मेरा फोन किसी दोस्त या बच्चे के हाथ में हो, तो वो मेरा व्हाट्सएप पेमेंट वाला हिस्सा खोल सके। मैंने प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर फिंगरप्रिंट लॉक को तुरंत पर सेट कर दिया। अब जब भी मैं व्हाट्सएप खोलता हूँ, ये मेरा अंगूठा मांगता है। मेरे इनफिनिक्स हॉट 10 में ये फीचर बहुत अच्छे से काम करता है।
वो एक गलती जिससे मैंने सबक सीखा (स्कैम अलर्ट)
मैंने ऊपर कहा था कि मैंने अपनी गलती से सीखा है, तो सुनिए क्या हुआ था। एक बार मेरे व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया कि भाई आपकी 5000 रुपये की लॉटरी लगी है, बस इस क्यूआर कोड को स्कैन करो और अपना पिन डालो। उस वक्त मैं नया-नया यूपीआई इस्तेमाल कर रहा था और मुझे लगा कि शायद पैसे ऐसे ही आते हैं।
जैसे ही मैंने स्कैन किया और पिन डालने की सोची, मेरे दिमाग में घंटी बजी—पैसे पाने के लिए पिन की क्या ज़रूरत? और वहीं मैं बच गया। भाई, एक बात हमेशा याद रखना, पैसे पाने के लिए कभी भी पिन डालने या स्कैन करने की ज़रूरत नहीं होती। अगर कोई आपसे कहे कि पिन डालो तभी पैसे आएंगे, तो समझ जाओ वो आपको लूटने की कोशिश कर रहा है।
क्या हमारा डेटा इंडिया से बाहर जाता है?
मेटा यानी फेसबुक व्हाट्सएप का मालिक है, और मुझे भी डर था कि कहीं मेरा बैंक का हिसाब-किताब अमेरिका न पहुँच जाए। पर मैंने एक टेक न्यूज़ में पढ़ा था कि भारत सरकार के नियमों के हिसाब से किसी भी पेमेंट ऐप को अपना डेटा भारत के सर्वर में ही रखना पड़ता है। इसका मतलब है कि आपका बैंक ट्रांजेक्शन इंडिया के अंदर ही सुरक्षित रहता है। और वैसे भी, व्हाट्सएप आपका यूपीआई पिन कभी देख ही नहीं सकता।
आखिरी बात
व्हाट्सएप पेमेंट इस्तेमाल करना बहुत आसान है, बस हमें थोड़े बेसिक नियम पता होने चाहिए। किसी अनजान की ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ को स्वीकार न करें और अपना पिन किसी को न बताएं। मैंने अब इसे अपनी रोज की लाइफ में शामिल कर लिया है क्योंकि ये बहुत सुविधाजनक है।
क्या आपने कभी व्हाट्सएप से पैसे भेजे हैं? या आपको अभी भी डर लगता है? नीचे कमेंट में बताएं। अगर आपको अपना बैंक अकाउंट लिंक करने में कोई दिक्कत आ रही है, तो अपने बैंक का नाम लिखें, मैं मदद करने की पूरी कोशिश करूँगा।